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रामचंद्र कह गए सिया से



ऐसा कलयुग आएगा


इसे समय की विडम्बना कहे या समय की गतिशीलता पर, आज के समय में जिस चीज को जा नहीं होना चाहिए वो वहीं पर विराजमान है। जहां जो नहीं होना चाहिए उसकी प्रासंगिकता आज वहीं बनी हुई है।
ऐसे में 'राम चंद्र कह गए सिया से'  गाने के आज के समय में मायने बढ़ से गए है।

तो चलिए आज बात करते है इस गाने की

परिवर्तन ही संसार का नियम है। जो समय के साथ होना भी चाहिए । किन्तु जब परिवर्तन का अर्थ बदलने सा लगे तब समझ लेना चाहिए कि आज गंगा उल्टी दिशा में बह रही है।

आज का समय वो समय नहीं जब माता पिता की बात बच्चे के लिए लोहे की लकीर बन जाएं बल्कि आज बच्चे अपने फैसले खुद लेने लगे है। आज काले धन को सफेद करने का जैसे समय ही चल आया है। जहां हर चीज को पवित्र बताया जा रहा है। कथनी और करनी में बदलाव आज साफ नजर आने लगा है। जहां धर्म के नाम पर लोग बांटे जा रहे है। विशेष रंग का उपयोग कर लोग खुद को संत बताने की कोशिश रहे है। जो खुद को ईश्नर से बड़ा बताने में लगे है।
जहां लोगों में दिखावा ज्यादा स्नेह कम दिखाई देने सा लगा है। जहां सादगी का कोई वजूद ही नहीं है। जहां उनके दिमाग में कुछ और वो दिखा अलग सा रहे है।
धर्म का अर्थ समझे बगैर लोग उसकी विशेषज्ञता हासिल करने की कोशिश कर रहे है।
जहां न बच्चे न बूढ़े सब की सोच में परिवर्तन आ गया है। जहां अगर कोई सत्यवादी इंसान मिल जाएं तो बड़ी बात है।
चेहरों के अंदर न जाने कितने मुकुटे को पहने ये दुनिया के लोग है।
ऐसे में इस गाने के मायने बढ़ से जाते है।


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