जब तक बोलेंगे नहीं, समझेगें कैसे




आज बच्चों से लेकर बड़े तक किसी न किसी प्रकार का तनाव झेल रहे हैं ∣ 
फिर चाहे वो अच्छे नंबर लाने का हो, नौकरी का हो, या अपनी आर्थिक स्थिति ठीक करने का इंसान इन सब को लेकर इतना तनाव ले रहा है। 
जो उसे एक तरह की बीमारी से ग्रसित बना रहा है ∣ 
इन सबसे बचने का तरीका है कि हम जीवन में अपनी प्राथमिकता तय कर ले । 

इसके अलावा हम जो युवा पीढ़ी  छोटी मोटी बातों को लेकर आज इतना दुःखी होने लगते हैं कि जीवन में खुद के होने का कारण नहीं समझ पाते हैं ∣ 
 ऐसे समय में हमें हर रोज खुद से सवाल करना होगा "कि आखिर हमारा उद्देश्य क्या है हम किस लिए इस दुनिया में आएं हैं हम क्या करना चाहते हैं? "



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