Skip to main content

प्रेमचंद के उपन्यासों के वो विचार जो आज भी प्रासंगिक है








लड़की का विवाह आज भी हमारे समाज उसके रूप रंग के बाद दहेज देखकर किया जाता है।

जिन रिश्तों के लिए हम अक्सर अपना सबकुछ कुर्बान कर देते है आगे चलकर वो भी अपना ही देखते है।

समाज के डर से अक्सर इंसान अपनी जिंदगी नरक बना देता है।

समाज में हर चीज जितनी बुरी दिखाई जाती है उतनी होती नहीं है।

एक औरत सबकुछ सह लेती है पर जब बात उसके चरित्र की आती है तब वो तिलमिला उठती है।

किसान का सपना केवल एक ही होता है गोदान

अक्सर बड़े घर की लड़की केवल अपने नाम से नहीं अपने काम से भी बड़ी होती है।

एक औरत सबकुछ सह लेती है किन्तु अपने मायके की बुराई नहीं।

जिस औरत को घर तोड़ने वाली कहा जाता है अक्सर वहीं घर को जोड़ने का काम करती है।





Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..