प्रेमचंद के उपन्यासों के वो विचार जो आज भी प्रासंगिक है








लड़की का विवाह आज भी हमारे समाज उसके रूप रंग के बाद दहेज देखकर किया जाता है।

जिन रिश्तों के लिए हम अक्सर अपना सबकुछ कुर्बान कर देते है आगे चलकर वो भी अपना ही देखते है।

समाज के डर से अक्सर इंसान अपनी जिंदगी नरक बना देता है।

समाज में हर चीज जितनी बुरी दिखाई जाती है उतनी होती नहीं है।

एक औरत सबकुछ सह लेती है पर जब बात उसके चरित्र की आती है तब वो तिलमिला उठती है।

किसान का सपना केवल एक ही होता है गोदान

अक्सर बड़े घर की लड़की केवल अपने नाम से नहीं अपने काम से भी बड़ी होती है।

एक औरत सबकुछ सह लेती है किन्तु अपने मायके की बुराई नहीं।

जिस औरत को घर तोड़ने वाली कहा जाता है अक्सर वहीं घर को जोड़ने का काम करती है।





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