पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी के वैसे तो सभी विचार आज के समय प्रासंगिक है। फिर चाहे वो अहिंसा का हो ,आत्मनिर्भर का हो ,स्वदेशी वस्तुओं का हो किन्तु आज हम उनके उस विचार पर बात करेंगें, जिसका अगर हमने पालन कर लिया। तो हम सब का आने वाला कल बेहतर होगा।
''जो बदलाव तुम दुनिया में देखना चाहते हो वो स्वयं में लाओं''
इसे विंडबना कहां जाएं या इंसान की कमजोरी किन्तु जब बात उसकी आती है। तब वो ये इससे बचने की कोशिश करता है। जो कभी किसी जनसंवाद में कभी संगोष्टी में हर जगह खुद को छिपाते हुए घूमता है। कि कहीं उसकी बात न आ जाएं।
जो एक ऐसी दुनिया चाहता है जहां किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। किन्तु वो खुद में इस तरह के सुधार करने से बचता है ।
आज के समय में जब हर व्यक्ति एक बेहतर कल की खोज में लगा हुआ है। जो एक ऐसी दुनिया को चाहता है जहां बुराई का कोई नाम न हो। ऐसी दुनिया के लिए पहले उसमें खुद में बदलाव करना होगा।
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