कितनी अजीब बात है न इंसान अक्सर चीजों की कीमत तब समझता है जब वो उसे खो चुका होता है। बात चाहे इंसान की हो या स्वास्थ्य की दोनों की कीमत वो उसके खोने के बाद ही मालूम कर पाता है।
अफसोस किन्तु जब वो इसकी कीमत समझ पाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
जब बात दिल की हो तब ये समझना जरूरी हो जाता है कि ये हमारे शरीर की वो चाबी है जिसका लगातार चलते रहना जरूरी होता है। जरा सा खराब होने पर इंसान टूट सा जाता है।
चाहें इसका कितना भी इलाज कर लो किन्तु इस पर एक बार इस पर कैंची चलने के बाद शरीर का एक भाग जैसे कमजोर सा हो जाता है।
साल दर साल बढ़ते जाते है किन्तु इसके जख्म कहां भर पाते है। बहुत होता है दर्द इसके खऱाब होने पर इंसान जब तक इसका कारण जान पाता है तब तक दिल की सेहत बहुत खराब हो चुकी होती है।
हमें लगता है हमारा स्वास्थ्य इससे किसी औरों को क्या लेना देना है किन्तु इसका खामियाजा हमारे आस पास के लोगों को भी भुगतान होता है।

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