देश में आज इसलिए जरूरत है महिला आरक्षण की

 
आज महिला आरक्षण केवल एक मुद्ददा नहीं है। बल्कि समय की जरूरत है। जो लंबे समय से विचाराधीन पड़ा हुआ है। इसी बीच एक बार फिर रोशनी की किरण दिखायी दे रही है। 
जब देश के नये संसद भवन में महिला आरक्षण बिल लाया गया है जिसे जितनी जल्दी हो सके लागू किया जाना चाहिए ।
हालांकि इसे लागू करने में दो मुख्य परेशानी आ रही है जिसमें एक जनगणना दूसरा परिसीमान है। जिसके चलते ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2029 तक इसे लागू किया जाएगा। 
कितनी अजीब बात है न आज जहां एक तरफ समानता के नारे लगाएं जा रहे है। वहीं दूसरी तरफ समय की भी विडम्बना देखें की जिसके लिए ये सब कुछ किया जा रहा है उसकी संख्या आजादी के 75 साल बाद भी संसद में केवल 15 फीसदी से ज्यादा नहीं है। 
जिस जी 20 को लेकर बड़ी हेडलाईन लिखी गयी है उसमें भी भारत का प्रतिनिधित्व केवल 24 फीसदी से कम है। 
ऐसे में ये कहने में बिल्कुल देरी नहीं लगती है कि इससे बेहतर स्थिति आज स्थानीय सरकार की है। जहां पर पंचायत के स्तर पर संरपंच बन महिलाएं बेहतर काम कर रही है। हालांकि कि इस बीच महिलाएं उन रूढ़ियों से भी लड़ रही है जो उनके अधिकारों को सीमित करने की बात कर रहे है। 
ऐसे में अगर महिला संसदों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है तो न सिर्फ देश की हर महिला को न्याय मिलेगा बल्कि आज अनेक तरह की परेशानी का सामना कर रहीं महिलाओं को बेहतर स्थान मिलेगा। 
जहां पर उनकी सुरक्षा , पोषण, स्वास्थ्य की सुविधाओं जैसे विषयों पर बात की जाएंगी।


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