Skip to main content

महिला आरक्षण का विरोध करने से पहले



किसी भी समाज की प्रगति के लिए दोनों पहिये का समान रूप से चलना जरूरी होता है किन्तु जब इसमें असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाती है। तब समाज में एक पक्ष मजबूत दूसरा कमजोर होता है।
आज जब बात महिला आरक्षण की आती है तब ज्यादात्तर लोग उसके विपक्ष में खड़े होकर ये कह देते हैं कि अगर वो काबिल है तो खुद को सिद्ध करें। आगे आएं अपना हक ले, उन्हें भला किसने रोका है ‌। 
ऐसे में ये समझना जरुरी हो जाता है कि ये वहीं महिला है जिसकी कभी समाज के डर से, कभी रीतिरिवाजों के चलते स्वतंत्रता छिन कर दिया जाता है।
ऐसे में जब एक महिला किसी क्षेत्र में आगे बढ़ती है । तब वो बहुत सी परेशानी का सामना कर वो अपनी राह को चुनती है । 

जब बात एक लोकतांत्रिक देश में आरक्षण की आती है तब समझना जरुरी हो जाता है ये बात एक दो लोगों की नहीं बल्कि देश की आधी आबादी की है ∣ जिनका विधानसभा से लेकर लोकसभा में प्रतिनिधित्व बहुत ही कम है ∣  
 न विकसित न विकासशील दोनों ही जगह पुरुष ज्यादा महिला का प्रतिनिधि कम है । उन्हें समानता दिलाने के लिए आरक्षण आज समय की मांग है क्योंकि ये उनका हक है । 

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..