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आम नागरिक की परेशानी पर प्रकाश डालती है'जवान' मूवी




शाहरुख़ की वैसे तो हर फिल्म अपने आप में खास होती है किन्तु जब हम बात उनकी फिल्म 'जवान' की करते हैं ∣ तब हम आम आदमी को इससे  जुड़ा हुआ पाते हैं ∣ 
इस फिल्म की कहानी वैसे तो विक्रम राठौर की कहानी को केन्द्र में रखकर लिखी गयी है ∣ किन्तु इसके अलावा इसमें किसान आत्महत्या, भष्ट्राचार और वोट बैंक जैसे गंभीर विषय को भी जोड़ गया है ∣ जहां आम आदमी अपना न्याय स्वयं करता है ∣ 
इस मूवी की कहानी दर्शकों को बांधे रखने का काम करती है ∣ जो कभी दर्शकों को हंसती तो कभी रुलाती है ∣ 
एक पल के लिए उन्हें सोचने के लिए मजबूर कर देती है कि इंसान हर चीज में इतना मोल भाव करता है किन्तु जब बात सरकार बनाने‌ की आती है तब वो इस पर ध्यान नहीं देता है ∣ 
 
रहा सवाल कि इस फिल्म को क्यों देखा जाना चाहिए? 
इस फिल्म में हम एक कहानी के जरिए देश में मौजूद अनेक  विषयों की गंभीरता को समझते है ∣ जहां हम सबका का ध्यान धर्म की राजनीति से हटकर मूलभूत विषयों पर लगता है ∣

अगर हम इस हफ्ते कुछ नया सा देखने की कोशिश कर रहे हैं 
तब हमें ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए जिसमें हमें शाहरुख़ , दीपक और नयनतारा की जबरदस्त केमस्ट्री देखने को मिलेगी। इसके साथ हमें एक्शन , संस्पेंस के अलावा उन लोगों का भी दर्द समझ आएगा। जो आज भी ओछी राजनीति के चलते सही होकर भी दुनिया की नजरों में गलत बन जाते हैं ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..