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दूरदर्शन का वो सीरियल जो आज भी देखा जाना चाहिए


आज भले हम सबका दूरदर्शन से ज्यादा लगावा न हो किन्तु एक वक्त ऐसा भी था। जब हमारी सुबह दूरदर्शन से शुरू उस पर ही खत्म होती थी। 
बात चाहें धार्मिक सीरियल की हो या हास्य, गीत की हो हर तरह के नाटक हम सब बड़े ही शौक से देखा करते थे। 
आज हम दूरदर्शन के उस सीरियल की बात करने वाले है जो अपने जरिए बहुत कहता हैं जिसके आज के समय में बहुत मायने हैं। 

1. रिपोर्टर

पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे ज्यादा जिस व्यक्ति की अहमियत होती है वो एक रिपोर्टर होता है। इसका काम खबरों को जुटाने का होता है। जो किसी भी संस्थान के जरूरी होता है। 
जैसा की हम सब जानते हैं कि कोई भी खबर बिना कब , क्यों , कैसे, कौन,कहां के  पूरी नहीं हो सकती है । 
इन्ही सब के बारें के उत्तर देते हुए ये सीरियल हमें न्यूज़ रूम के बारे में बताता है। 
एक रिपोर्ट जब समाज की बुराई से लड़ता है। तब उसे किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है वो ये सीरियल बताता है। 
केवल पत्रकारिता का मतलब टीवी में दिखाई दे रही एंकर ही नहीं होती है उसके पीछे कितने लोगों की मेहनत छिपी होती है। 
जहां खोजी पत्रकारिता किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है इस सीरियल को देख हमें मालूम चलता है। 

2. कब क्यों कैसे

आज भले ही जब अपराध की सच्ची घटनाओं की कहानी पेश करने वाले के लिए सावधान इंडिया का नाम हम सब की जुबान पर सबसे पहले आता है  किन्तु 'कब क्यों कैसे' सीरियल अपराध के कारण से लेकर उसके रोकथाम तक की बात मजबूती से हमारे बीच पेश करता था। 



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..