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प्रकृति से खिलवाड़ , प्लास्टिक से प्यार



कहते है कि इंसान ने अपने मस्तिष्क के विकास के चलते सभी चीजों का निर्माण किया है ∣ किन्तु पर्यावरण के मामले में ऐसा लगता है कि मानव ने विकास कम उसका सर्वनाश ज्यादा किया है। जहां पर उसने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्लास्टिक के ढेर में लाकर उसे खड़ा कर दिया है। जहां से अगर हम समय रहते नहीं निकले तो बहुत देर हो जाएगी।
हालांकि भारत प्राचीन समय से ही प्रकृति प्रेमी रहा है। जहां के अगर हम इतिहास को देखें तो उसका पूरा जीवन प्रकृति के आश्रय में शुरू वहीं खत्म हो जाता था।किन्तु कहते हैं न आवश्यकता आविष्कार की जननी है जैसे- जैसे लोगों की आवश्यकता बढ़ी। 
 जो मिट्टी के कप में चाय पीते थे उन्होंने उसकी जगह 
  कांच को रख लिया। 
 अफ़सोस बेहतर के लालच ने सबकुछ प्रदूषित कर दिया। 
जो अब नदी, तालाब के अलावा हमारी थाली तक पहुंच रहा है ∣ 
अगर समय रहते हमने इस पर काम न किया तो आने वाला भविष्य हम सब का बुरा हो सकता है।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..