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जीवन में स्वाद के मायने



जीवन में एक समय के बाद स्वाद के मायने बदल जाते है। एक समय होता है जब व्यक्ति उसे पाने के लिए जी तोड़ मेहनत करता है। एक वक्त के बाद जैसे उसके न होने से उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। समय के साथ इंसान की सोच बदल जाया करती है। इसके बावजूद इंसान को जो चीज ताउम्र पसंद आएं वो अपने आप में बहुत खास होती है। 

जीवन का स्वाद इसलिए खास होता है

जीवन का स्वाद भी अपने आप में निराला होता है। अच्छे- बुरे अनुभवों का स्वाद लेकर ही तो व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है। कई बार अपनी बेहतरी के लिए उसे बेस्वाद चीजों का भी पान करना पड़ता है। अक्सर जीवन में कड़वी चीजों का असर केवल बुरा ही हो ये जरूरी नहीं होता है। कई बार इनके चलते ही व्यक्ति जीवन में बेहतर इंसान बनता है।

हर चीज का अपना महत्व होता है

 जिस तरह नमक की अति से भोजन खराब होता है ठीक उसी तरह उसके न होने से, चाहे कितने सुंदर व्यंजन क्यों न हो, पर वो बेस्वाद ही होता है। ठीक उसी तरह जीवन में अच्छे- बुरे पलों का आना जाना जरूरी होता है। 


स्वाद का सम्बन्ध इससे  गहरा होता है

स्वाद के साथ जो लोगों को आकर्षित करने लगे उसका लोग के बीच आज भी बड़ा नाम होता है किन्तु अक्सर ये बिल्कुल भी जरूरी नहीं होता है कि हर आकर्षित करती चीज स्वादिष्ट ही हो। कई बार उसका स्वाद भी बेस्वाद सा होता है।

भोजन के अलावा भी स्वाद का महत्व होता है

केवल भोजन में ही नहीं स्वाद जीवन के हर पहलू के लिए जरूरी होता है। कोई अच्छा बोलकर अपनी वाणी में स्वाद भर देता है किसी की मुस्कुराहट में एक तरह का स्वाद होता है। ये स्वाद ही तो होता है जो व्यक्ति को उसके ओर खीचें ले जाता है।

साहित्य में भी एक तरह का स्वाद होता है

साहित्य में भी एक तरह का अनोखा स्वाद होता है जिसे पढ़ व्यक्ति कई तरह के स्वाद को चख लेता है। उसमें होते तो काले- काले स्वाद ही है किन्तु जब वो उसे पढ़ है तो उसकी दुनिया में खो सा जाता है। एक पल के लिए अपनी जीवन के दुख दर्द भूल वो उसका आनंद लेने लगता है। 


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