जिंदगी के सिर्फ 1500 शब्द


क्या हो जब हमें ये मालूम चले, कि अब हमारे पास केवल 1500 ही शब्द बचें है जिनका  हमें अपने जीवन में उपयोग करना है। 
ऐसे में एक पल के लिए तो हमें खुद पर बहुत ज्यादा गुस्सा सा आएगा। हम रोने सा लगेगें।
समय के साथ हमें अब अपने उन 1500 सौ शब्दों का उपयोग कहां करना है इसका हम प्रबंधन करेंगे। 
इस बीच हम जीवन में शब्दों के महत्व को समझेंगे।जिनका उपयोग हमने सिर्फ लोगों को बुरा कहने में खर्च कर दिया है। 
इस समय हम केवल ऐसे शब्दों का प्रयोग करना चाहेंगे। जो किसी को परेशान न करते हो। जिनको सुन उन्हें बुरा न लगता हो। 
जो किसी को खुश करने वाले हो। जो दिल को जोड़ने वाले शब्द हो। 
ये हमारे जीवन का एक ऐसा अकाल होगा। जिसे हमें बिना शब्द के ही पूरा करना होगा। 
एक पल के लिए जब हम खुद को इस समस्या से घिरे पाते है तो हम खुद को असहाय सा समझने लगते है। हमारे लिए सबकुछ जैसे खत्म सा हो गया होता है।
 पर अफसोस वास्तविक जीवन में हम में से ज्यादात्तर लोग अपने बहुमूल्य शब्दों का उपयोग किसी को भला बुरा कहने में खर्च कर देते है बिना ये सोचे कि उसका असर सामने वाला पर क्या पड़ेगा। बेववजह शब्दों को बर्बाद कर देते है। भले उसकी जरूरत सामने वाले को हो या न हो।

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