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आदिवासियों के हितों की बात करता है 'वर्ल्ड ट्राइबल डे'


जल‌,जंगल और जमीन के सच्चे रखवाले‌ वो 'आदिवासी' होते हैं ∣ जो अपनी जान की परवाह करें बगैर प्रकृति संसाधनों को बचाने की कोशिश करते हैं ∣ 

पर अफसोस जब बात उनके
 अधिकारों की आती हैं ∣ तब विकास के नाम पर उनके अधिकारों  छिन लिये जातें है ∣ आज भी गांव में उन्हें जाति प्रथा के नाम पर सबसे नीचे रख दिया जाता है ∣ 
आदिवासी जो आज भी उतने पीछे है जितना की पहले थे। 
आदिवासी समाज का वो तबका जो विकास की प्रगति में कहीं पीछे छूट गए हैं ∣ उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए ये 'वर्ल्ड ट्राइबल डे' दिवस मनाया जाता है ∣ इसका उद्देश्य आदिवासियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है ∣ 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..