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जब बात रिश्तों की मजबूती की हो


हर बेबसी से जो बचा लेते है
दर्द हमें हो पर वो बांट लेते है
जिनको फिक्र होती है हमारी
जो जीवन के हर मुश्किल पल में
हमें जिंदा रहने की वजह दे जाते है।

इस दुनिया में जहां बात मतलब से शुरूऔर उस पर ही खत्म हो जाती है। ऐसे समय में केवल रिश्ते ही होते है जो हर मतलब से परे होते है। जो सफलता में हमारा हौसला बढ़ते तो असफलता में हमारा साथ दे जाते है।  जिनको फर्क नहीं पड़ता हमारे रूप रंग से जो हमें जीवन में कुछ बेहतर करने की सीख दे जाते है। ये रिश्तें ही तो है जो पूरी दुनिया को एक साथ बांध कर रखते है। जो इंसान को रंगबिरंगी दुनिया से वास्तविक दुनिया की ओर ले जाते है। जो उन्हें खुद के होने का अहसास करते है।
ये रिश्ते ही तो होते है जो मुश्किल वक्त में काम आते है वरना आज के जमाने में बहुत कम ही वो लोग है जो बेमतलब ही किसी को याद कर लिया करते है।  
भारत में रिश्तों की अपनी एक परंपरा है जहां अनजान व्यक्ति से भी हमारा रिश्ता बन जाता है। जैसे बरसों से जानते हो उस शख्स को जहां ट्रेन के डिब्बे में खाली बैठा इंसान भी खुद को अपनों के बीच पाता है। जहां पेड़ोसी को भी रिश्तेदार माना जाता है। यहीं तो है भारतीय परंपरा जहां अकेला होकर भी इंसान खुद को करीबियों के बीच पाता है। भले हो भाषा अलग या वेश भूषा किन्तु वो एक दूसरे के भाव को समझ पाता है।

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