वो राखी

दुनिया की सारी खुशी एक जगह ओर भाई बहन के रक्षाबंधन पर मिलने की खुशी एक तरफ ही होती है। आखिर हो भी क्यों न, ये रक्षाबंधन का त्यौहार ही तो होता है। जब भाई- बहन एक दूसरों की अहमियत को समझते है। जहां बहन अपने भाई की सलामती की दुआ करती है,वहीं भाई बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है।  

पर अफसोस आज भी कितने ऐसे भाई- बहन है जिनके लिए ये राखी सूनी सी है। 
हर बहन की तरह उषा भी रक्षाबंधन के दिन अपने भाई का बेसब्री से इंतजार किया करती थी। शायद ही ऐसी कोई राखी गई होगी। जब उषा ने अपने भाई को राखी न बांधी हो।
पर एक दुर्घटना ने जैसे उषा की पूरी जिंदगी बदल दी। दरअसल कोरोना काल से पहले उसके भाई की एक हादसे के दौरान सिर पर गंभीर चोट लगने से मौत हो गयी। वो दिन था और आज का दिन है जब राखी तो हर साल आती है। पर उषा के लिए राखी का अब कोई खास मतलब नहीं बचा है। अब उषा का वो भाई उससे कहीं दूर जा चुका है।
वो राखी अब सिर्फ एक धागा नहीं उषा के लिए एक यादगार लम्हा बन चुका है ∣ जिनकी यादें के सहारे उषा को अपनी आगे की जिंदगी को जीना होगा। 


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