भारत बना चांद पर साॅफ्ट लैंडिंग करने वाले चौथा देश

 

भारत ने आज चांद पर सफलतापूर्वक साॅफ्ट लैंडिंग कर डाली है। सोवियत संघ ,अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया है। वहीं चांद के साउथ पोल पर लैंड करने वाला भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है ∣

चंद्रयान मिशन 2 से कितना अलग था ये मिशन-  बता दें भारत ने इस बार चंद्रयान 2 से सीख लेते हुए चंद्रयान मिशन 3 लांच किया है ∣ जहां चंद्रायान मिशन 2 चांद के केवल 4 किलोमीटर सतह पर लैंड करने वाला था। वहीं चंद्रयान मिशन 3 को उसके 40 गुना किलोमीटर पर लैंड किया गया है। 

चांद पर रहेगा रोवर इतने दिन-
 भारत विश्व का पहला देश बन गया है जिसने चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैडिंग की है । इस मिशन में रोवर को चांद के साउथ पोल पर एक लूना दिन (1 महीने) रहना होगा।

चंद्रयान 3 मिशन आखिर क्यों है खास-
बता दें कि इस मिशन में कुल सात उपकरण लगें हुए है । इसके अलावा में प्रपल्शन मॉडल जहां के चांद के चारो ओर घूमेगा। वहीं प्रज्ञान चांद पर मौजूद मिट्टी की जांंच करेगा। उस समय विक्रम लैंडर उसकी फोटो खीचेंगा।


बता दें कि चांद पर 6 प्रकार के मिशन भेजे जाते है जो इस प्रकार से है-

1.FLY- By- MISSION-  इस मिशन में स्पेसकाॅफ्ट चांद के पास से उड़कर  निकल जाता है। इसका उपयोग तब किया जाता है ∣ जब किसी मिशन के रास्ते में चांद पड़ता है। 
वहीं अगर हम इस मिशन के इतिहास की ओर गौर करें, तो सबसे पहले सोवियत संघ के द्वारा चांद पर 'Fly-by Mission' भेजा गया था जिसे हम 'लूना मिशन' के नाम से जानते है ।

2. ORBITER MISSION - इस  मिशन में स्पेस काफ्ट चांद के चारों ओर के चक्कर लगाता है इसे ' लूना ओरविट मिशन' कहा जाता है। ये मिशन चांद के पास मौजूद चीजों को देखता है।

3. IMPACT MISSION- ये मिशन Orbiter Mission का बेहतर रूप है। इसमें आर्बिटर का एक भाग चांद पर जाकर गिरता है जिसे 'मून इम्पेक्ट ' भी कहा जाता है। ये चांद के करीब पहुंचते हुए उसकी रीडिंग लेता है। 
बता दें कि भारत का चंद्रयान मिशन 1 भी एक इम्पेक्ट मिशन ही रहा है। इसके जरिए भारत ने दुनिया को चांद पर पानी होने की सूचना दी थी। इस उपकरण का नाम CHANDRA'S ALTITUDINAL COMPOSITION EXPLORER जिसे संक्षेप में  'CHACE'  कहा जाता है। इसके जरिए चांद की हर 4 सेकण्ड में रीडिंग ली गयी थी । 

4.LANDER MISSION-  इसमें आर्बिटर को अपना एक हिस्सा चांद पर गिरने की बजाएं, उसमें साॅफ्ट लैंडिंग करना होता है। इसमें एक स्पेस काॅफ्ट को चांद पर भेजा जाता है जो हिस्सा लैंड करता है उसे लैंडर कहा जाता है। ये मिशन कितना कठिन है। 
इसे हम ऐसे समझ सकते है। कि अमेरिका,सोवियत संघ के करीब 15 साॅफ्ट लैंडिंग की थी। किन्तु इतने प्रयासों के बावजूद उनको सफलता हाथ नहीं लगी थी। 
आखिरकार 1966 में सोवियत संघ 'लूना 9 मिशन' के जरिए पहली बार इसमें  साॅफ्ट लैंडिंग की थी है। इस मिशन की सफलता के चलते स्पेस कॉफ्ट ने चांद की पहली फोटो ली थी।

5. ROVER MISSION- इसके रोवर चांद की सतह पर घूमाता है । सोवियत संघ ने 1970 में इस ROVER मिशन पर सफलता हासिल की थी। इस मिशन के जरिए रोवर को सीधे चांद से जोड़ा जाता है।
 
6. HUMAN MISSION- चांद पर जब इस मिशन की बात आती है तब केवल अमेरिका ऐसा देश हमारे सामने आता है । अमेरिका के वैज्ञानिक 'नील आर्मस्ट्रांग' ने सबसे पहले 1966  में चांद पर अपना पहला कदम रखा था। तब से लेकर आज तक अमेरिका एंजेसी 'नासा' के 12 वैज्ञानिकों ने इस मिशन पर सफलता पायी है ∣

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