जहां आज भी रंग के नाम पर भेद किया जाता हैं
बेटा हुआ तो घर का चिराग आया है
बेटी हुई है तो घर में लक्ष्मी आयी है
ये कहकर उसे बोझ साबित किया करते हैं ∣
जहां एक लड़की की खूबसूरती ही
उसका सबकुछ हो जाती है
कितनी की है उसने पढ़ाई
क्या रखती है वो ख्वाहिशें
इससे जैसे किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता है ∣
क्यों आज भी लड़की हुयी अगर काली
तो उसका तिरस्कार किया करते है ∣
माँ हाउसवाइफ है ये कहकर जो अपनी आवाज धीमी किया करते हैं
जरा पूछो उनसे उस माँ को कब वो अहमियत दिया करते हैं
जिनके कारण वो सुकून से अपना काम किया करते हैं ∣
लड़का कमां के आए तो बड़ा गर्व
बहु कमाई पायी है क्यों इस पर तंज कसते है ∣
क्यों लड़की को सहनशीलता की मूर्ति बनाने में कोई कसर नही छोड़ते है ∣
जब बात लड़के की आएं तो उसे गुस्से वाला कहकर उसकी गलतियां नजर अंदाज किया करते हैं ∣
क्यों आज भी लड़की के कपड़ो की लंबाई देख
उसके चरित्र को हम तय किया करते हैं ∣

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