आजादी के मायने वो ही समझ सकता है जिसने कभी गुलामी की हो। ये वाक्य कहनें में जितना आसान लगता है वास्ताव में उतना है नहीं ।
हम सब का ये सौभाग्य रहा है कि हम एक आजाद देश में पैदा हुए हैं।
पर आज जब हम अपने आस पास के लोगों को देखते है तो उन्हें एक तरह की गुलामी का शिकार पाते है। जो इंटरनेट की दुनिया से बाहर नहीं निकल पा रहे है। जो वैसे तो खुद को देशभक्त बताते है। पर जब बात असली सच्ची देशभक्ति की आती है तब वो नज़र नहीं आते है।
वो एक लोकतंत्र वाले देश में है ये भूल जाते हैं ∣ जहां जनता का शासन है। जो पूरी दुनिया को 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का पाठ पढ़ाते आया है। नालंदा ,तक्षशिला जिसकी देन है।
फिर भला क्यों आज हम इतने असहिष्णु हो गए है कि छोटी - छोटी बातों पर वाद विवाद करने लगे है। धर्म, जाति के नाम पर एक दूसरे के दुश्मन हो गए हैं।
हम सबको ये ध्यान देने की जरूरत है कि जिस भूमि पर हम खड़े है उसे आजादी दिलाने में अनगिनत लोगों का हाथ रहा है।
उस भूमि पर अनेक पराक्रमी लोग जन्मे है जो अपनी प्राचीन सभ्यता के लिए जाना जाता है ∣ जो स्वामी विवेकानंद की जन्म और कर्मस्थली है।

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