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आध्यत्मिकता का असली अर्थ बताता है 'गौरा'


उपन्यास की कहानी जानने के लिए यहां क्लिक करें। 
https://poojabhopal.blogspot.com/2020/07/blog-post_30.html 
हम सबकी धर्म को लेकर अपनी अपनी आस्था है जिसके साथ हम जीवन को जीते है अपने कुछ नियमों का पालन करते है। 
आज के समय में जब धर्म के नाम पर दुनिया को जीतने की कोशिश की जा रही है। ऐसे समय में कुछ उन परतों को खोलना जरुरी हो जाता है जो हमें धर्म की असली परिभाषा बताती है। 
आज गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोंंर की पुण्यतिथि पर जानते है उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'गौरा' के बारें में जो हमें आध्यत्मिकता का असली अर्थ बताता है।
'गौरा' उपन्यास को जब हम पढ़ते है तब समाज के एक दूसरे रुप को जानते है। जहां लोग चाहे कितना भी पढ़ लिख ले पर वो दिमाग से कम ही शिक्षित होते है । केवल धर्म और जाति के नाम पर खुद को श्रेष्ठ समझने की भूल करते है। 
सादियों से बनाये गये रीति रिवाजों को ढ़ोते चले आते है। पर अफसोस जब उन्हें मालूम चलता है कि जिन नियम विचार का वो पालना करते आ रहे है। वो ही झूठ की बुनियाद पर रखे गए है। तब वो इंसान टूट जाते है। ऐसे समय में वो एक ऐसे धर्म का सहारा लेते है ∣ जो केवल मानवता के धर्म को समझते  है ∣ जहां जाति , कुल के नाम पर कोई श्रेष्ठ नहीं है ∣ सब एक सम्मान है ∣ जो शाश्वत सत्य है ∣ 
हालांकि इसी बीच हम सबको ये ध्यान रखना चाहिए कि हिन्दू एक ऐसा धर्म  है जो समय के साथ बदला है ∣‌ कुरीतियों का विरोध समय समय पर किया है ∣ 
दुनिया के सबसे बड़े  सनातन धर्म के रूप में हमारे सामने आया है ∣ 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..