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आखिर क्या है उन्मेष जिसकी हो रही है इतनी चर्चा

उद्घाटन सत्र के समापन की एक झलक जिसमें राष्ट्रपति दौपद्री मूर्मू उपस्थित रही

 उन्मेष मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित होने वाला अंतराष्ट्रीय साहित्य फेस्टिवल है जो कि दिनांक 3 अगस्त से 5 अगस्त तक रवींद्र भवन में चलने वाला है ∣ इसमें देश के हर कोने से आएं लेखक अपने रचना को प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही देश की जनजातियों के द्वारा अपनी लोककला की अभिव्यक्ति की जाएगी। 


इसका कारण खास है ये फेस्टिवल 

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत साहित्य अकादमी और संस्कृति मंत्रालय के साथ मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से ये तीन दिवसीय महोत्सव चलाया जा रहा है ∣ इसका उद्देश्य साहित्य के मंच पर लेखकों को एक साथ लाना है ∣

उत्कर्ष का क्या है इस फेस्टिवल से सम्बंध

उत्कर्ष जिसका आशय उन्नति से है ∣ इस फेस्टिवल में देश के हर कोने से जनजाति अपनी लोककला का प्रदर्शन करने वाली है ∣

मध्यप्रदेश में क्यों हो रहा है ये फेस्टिवल

जैसा कि हम जानते हैं कि मध्यप्रदेश गाँव का प्रदेश है ∣ जहां पर राज्य की आधी से ज्यादा जनता गांव में निवास करती है ∣ वो एक जनजाति बहुल राज्य है ∣ ऐसे में इस फेस्टिवल को यहां पर करने का औचित्य बनता है ∣

मध्यप्रदेश का साहित्य अकादमी से क्या है नाता

साहित्य अकादमी की स्थापना 1954 में हुई थी। जबकि पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार दादा माखनलाल चतुर्वेदी को 'पुष्प की अभिलाषा' के लिए 1955 में मिला था। 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..