अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जानी जाने वाली मीना कुमारी वैसे तो अपनी हर एक फिल्म के लिए जानी जाती है । पर जब बात उनके सादे व्यक्तित्व की आती है। तब हमारे सामने उनकी मूवी 'मैं चुप रहूंगी' सामने दिखाई देती है।
इस फिल्म में मीना कुमारी ने गायत्री नाम की एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया है। जो अपने धैर्य और संवेदना के लिए जानी जाती है। पर अफसोस जब बात उसके बेटे की आती है। तब समाज के डर से उसकी झोली से उसकी संतान छिन अनाथ आश्रम में डाल दी जाती है।
फिर शुरू होती है मर्यादा, धैर्य और समर्पण की लड़ाई जहां पर वो सबके खातिर अपने ही बेटे को उसके वास्तविक पिता के बारें में कुछ नहीं बता पाती है।
इस पूरी फिल्म में गायत्री की चुपी समाज के मुंह पर वो तमाचा नजर आती है जिसे हमेशा केवल सुनना सिखाया गया है ∣
फिल्म अपने पीछे एक गहरा संदेश छोड़ जाती है कि
हर बार गलती एक मां कि नहीं, उस समाज की भी होती है जो जायज संतान को नाजायज का तिलक लगाने में देरी नहीं करती है इसके चलते न जानें कितनी मां अपने बच्चों से दूर कर दी जाती है। उसे मजबूर कर दिया जाता है चुप रहने को केवल वो निदोष होकर भी दूसरे के हाथ की कठपुतली बन जाती है।
इस मूवी को मीना कुमारी का एक दूसरा रुप हम पाते है । जहां वो परिस्थितियों के बीच झूलती नजर आती है।
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