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अलार्म घड़ी


इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो अपने काम के लिए खुद पर निर्भर होते हैं ∣ जिन्हें कहीं भी समय पर जाने के लिए किसी तरह की घड़ी का प्रयोग नहीं करना होता है ∣
दूसरी तरफ वे लोग होते हैं ∣ जो हर चीज के लिए अलार्म घड़ी पर निर्भर होते हैं ∣ जिनकी सुबह की नींद उस घड़ी के बजने के बाद ही शुरू होती है ∣ ऐसा नहीं दूसरे तरह के लोगों को अपने काम की फ्रिक नहीं होती है किन्तु वो अलार्म घड़ी से ज्यादा खुद पर विश्वास नहीं कर पाते हैं कि व़ो समय पर उठ जाएगें। 
आज के समय में ये हमें निश्चित करना है कि हम अलार्म घड़ी पर ज्यादा निर्भर होते हैं या अपने चिंतन पर जो हमें समय पर उठने को जोर देती है ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..