महज कुछ अपवादों को देखकर परिणाम नहीं निकाला जाना चाहिए


अच्छी आदतों को बनाना जितना मुश्किल होता है ठीक उसके विपरीत खराब आदतों का बनाना आसान होता है । 
सकारात्मक चीजों पर लोगों का ध्यान भले ही कम जाएं पर वो नकारात्मक चीजों से बहुत जल्दी सीख लेने लगते हैं। 
जब बात समाज के उस तबके की हो जिससे लगातार उसके अधिकार छिन लिए जा रहे हो। तब इसका असर और ज्यादा पड़ता दिखाई देता है। जहां उसे कुछ अपवादों के बल पर कमजोर करने की क़ोशिश की जाती है। 
ऐसा करते वक्त हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि महज कुछ अपवाद‌ हर किसी की सच्चाई नहीं बताते हैं। ये हम पर निर्भर करता है कि हम उसे किस तरह से लेते हैं। 

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