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क्या लिखा जाएं, जब कुछ


शब्दों से खेलना क्या आसान होता है? 

जब दूर दूर तक उसके अर्थों से न हो कोई वास्ता, 
जरूरी नहीं अच्छा लिखा जाएं 
बहुत पढ़के
जरूरी नहीं बिना पढ़े अच्छा लिखा जाएं। 
क्या लिखा जा सकता है कुछ भी बिना  कुछ अनुभव किए ।

जहां अनुभव से अनुभूति का कोई जिक्र मात्र न हो। क्या बिना सोचे विचारे कुछ लिखा जा सकता है ∣
नहीं, अगर ऐसा करने की कोशिश की जाएगी। तो वो
रसहीन हो जाएगा। जो अपने अंदर किसी तरह का कोई रस नहीं रख पाएगा। 


ऐसे ही कुछ भी नहीं लिखा जा सकता है
जब तक उसमें संघर्ष न हो, सृजन की कोई प्रक्रिया न‌ हो
तब तक शब्दों के साथ नहीं खेला जा सकता है ∣

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..