जहां नहीं शेष कोई आश
चारों और बिखरे सिर्फ मृत अवशेष
ऐसे में ये जिंदगी अपना एक अलग रंग दिखाती है।
क ई बार सबकुछ खत्म हो जाने पर भी मिल जाती है जीने की उम्मीद तो
क ई बार अपना जीवन शेष बाकी सब मृत शेष देखकरऐसे वक्त में भी जिंदगी जैसे हम पर अपना क्रोध जता रही होती है
इसके बावजूद जो लोग
लड़ते हैं उस खौफनाक मंजर से
जहां जिंदगी रहने की उम्मीद कुछ शेष न रहती है।
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