बेशकीमती चीजों को फेका नहीं बल्कि उनकी कद्र की जाती है ∣
मुफ्त के दाम बिकाने वाली चीजों का जहां कोई भी मूल्य नहीं रह जाता है ∣ वहीं दूसरी तरफ मंहगी चीजों को बड़ा सजो कर रखा जाता है इसे हर कोई नहीं खरीदता है और जो खरीदता है उसे इसकी कद्र होती है ∣
उसी तरह व्यक्ति होता है ∣ जो अपनी काबिलियत के दम पर परखा जाता है ∣
आज के प्रतियोगितावादी समय में निश्चित हमें करना है कि हमें सस्ता इंसान बनना है या मंहगा।
ये बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि हम स्वयं पर कितना समय खर्च करते हैं ∣

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