जब इंसान किताबों के बीच जाता है । तब वो अपने अंदर मौजूद खालीपन को जान पाता है ।
कितना कुछ बाकी है उसे पढने और जानने को वो ये महसूस कर पाता है।
जो इस दुनिया के झूठ से नहीं केवल अपने अंदर छिपे ज्ञान के आधार पर जानी जाता है।
जो हमें जीवन में शांति के साथ काम करते जाने की सीख दे जाता है। कुछ वक्त के लिए इस दुनिया से अलग कहीं दूर ले जाता है। जहां वो और केवल हमारा अपनापन होता है।
कितनी भी आज जाएं तकनीक लेकिन वो इस किताब की जगह कहां ले पाता है।

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