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सोच नयी



वो‌ लड़की हुई है ∣ घर में लक्ष्मी आयी है कहने भले ,घर में पैदा हुई लड़की से उसका पहला हक छीन लेते हैं वो है ' उसके पैदा होने की खुशी'। जैसे- जैसे वो‌ बड़ी होती है उसके हाथ में जिम्मेदारी ज्यादा उसका महत्व कम सा आंकने लगते हैं ∣ 
इसी बीच उसके लिए इस मुश्किल राह में बहुत कम ही लोग होते हैं जो उसे अपने पैरों पर खड़ा देखना चाहते है। 
 इन सब बातों को दरकिनार कर जब वो लड़की अपने पैरों पर खड़ी होती है ∣ समाज के लिए नयी परिभाषा गढ़ती है तब वो समाज को एक अलग दिशा देती है ∣
इसके बावजूद इस पुरुष प्रधान समाज का ये कहना बड़ा आसान होता है कि क्या करेगी पढ़ लिख के, कलेक्टर थोड़ी न बनाना है । ऐसे में हम सब को ये बात बिल्कुल  नहीं भूलना चाहिए कि मेट्रो और रेट्रो में जमीन आसमान का फर्क है। भले ही आज कुछ लोग खुद को मेट्रो की तरह पेश करने लगे हो किन्तु उनकी सोच केवल 'रेट्रो ' तक ही सीमित है । जहां स्त्री मतलब घर की चारदीवारी है । 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..