जिंदगी के सफर गुजर जाते हैं फिर नहीं आते हैं

जिंदगी का भी अपना अलग ही सिद्धांत है। जहां पर जब हम इसे समझने लायक होते हैं तब तक ये हम से कहीं आगे निकल चुकी होती है ।
ऐसा लगता है कि जैसे आज ही का तो वो दिन था। जब हमने इसे थोड़ा समझना शुरू किया था। ये समय भी निकल गया। 
समय लगा मानों इतनी तेज गति से चला। कि हम समझ भी न पाएं । दुनिया यहां से वहां कब निकल गयी। 

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