आज के समय में रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों की प्रासंगिकता



आज ही के दिन साहित्य में पहला नोबेल पुरस्कार पाने वाले रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 हुआ था। राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' के दाता टैगोर न केवल अपने विचारों बल्कि अपने व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते थे। आज वर्तमान समय जब लोग सफलता पाना तो चाहते हैं किन्तु उसके लिए पर्याप्त कोशिश करने से पीछे हटते है । वो कुछ नया करने से डरते हैं 
ऐसे समय में टैगोर के विचारों की प्रासंगिकता और ज्यादा बढ़ जाती है। 
आज हम जानेंगें, उनके उन विचारों को जिससे हम अपने जीवन में एक नया दृष्टिकोण पा सकते हैं। हम इस दुनिया को एक दूसरी नजर से देख सकते हैं।
आइये, आज हम उनकी जयंती के अवसर पर उनके कुछ विचारों को आत्मसात करने की कोशिश करें.. 

1.किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिए,क्योंकि वह इसी समय पैदा हुआ है

आज हम से ज्यादातर लोग जो दुनिया थोड़ा बहुत समझ जाते है दुनिया के नियम कायदों को भली रूप से पहचानते है ऐसे समय में हम खुद को सर्वज्ञानी समझने लगते है हम अपने से छोटे को इस तरह का ज्ञान देने लगते है जैसे कि हम ही उसकी दुनिया है हम उसे अपनी तरह बनाने की कोशिश करने लगते है। ऐसा करते वक्त हम भूल जाते है कि वो आज के समय का पैदा हुआ बच्चा है जो एक अलग तरह के परिवर्तन के बीच पैदा हुआ है।

2.यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा
इंसान गलती करके ही सिखाता है। गलती ही इंसान की सबसे बड़ी मित्र होती है। जो उसे जीवन जीने का पाठ सिखा देती है। अक्सर जब इंसान किसी चीज में बहुत ज्यादा गलती करने लगता है तब उसे लगता है कि वो बहुत ज्यादा नयी चीजों को सीखने के चलते अनेक तरह की परेशानी का सामना कर रहा है। इसके कारण वो कुछ नया करने से डरने लगता है। 

3.कला में व्यक्ति खुद को उजागर करता है कलाकृति को नहीं
कला जो व्यक्ति को अभिव्यक्ति का नया जरिया देती है । इसके माध्यम से वो खुद को अभिव्यक्त कर पाता है वो किसी चीज  को लेकर कैसा सोचता है उसे कैसे महसूस कर पाता है उसके अनुरूप ही वो किसी चीज का सर्जन कर पाता है। 

4. सिर्फ खड़े होकर नदी देखने से हम नदी को नहीं पार कर सकते है
आज भी जब बात मेहनत करने की आती है तब हम में से ज्यादातर लोग उसे केवल ऊपर से ही देख रहे होते है हम उसका मूल्यांकन ऊपरी सतह से ही कर रहे होते है। बिना उसके अनुभव लिया। ऐसा करते वक्त हम भूल जाते है कि किसी भी चीज पर विचार करने से बहुत अलग उसका अनुभव होता है। 
जब हम सफलता के पलों को पाना चाहते है तब हमें पहले उसके लिए खुद को बनाना होता है।

5.हम महानता के सबसे करीब तब होते है जब हम विनम्रता के करीब आ जाते है
इंसान का सबसे बड़ा शत्रु उसका क्रोध होता है जो धीरे धीरे उसको समाप्त कर देता है। जो व्यक्ति अपने क्रोध पर विजय पा लेता है वो पूरी दुनिया को अपने सामने झुका लेता है। 

आज वर्तमान समय में जब हम दुनिया को ये दिखने में लगे हैं। कि हम से समझदार इस दुनिया में कोई भी नहीं है केवल हम ही सबसे ज्यादा समझदार है । ऐसे समय में हमें उन महान व्यक्तित्व को लेकर चलना चाहिए। जो लगातार हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जा रहे हैं ।  

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