इम्तिहान जिंदगी के अक्सर हमें कमजोर नहीं बल्कि हमें मजबूत बनाने आते है। कई बार ये जरूरी नहीं होता है। कि हम उस परीक्षा में पास ही हो केवल उसमें खुद को रखना होता है। ये परीक्षा ही तो होती है। जो हमें जीवन के अनुभवों से सीख लेकर आगे चलने का हौसला देती है। इसे देकर हम पहले से ज्यादा बेहतर होते है।' किसी भी खास शख्सियत का जन्म अक्सर ढ़ेरों तूफानों के बीच में होता है।'
आसान नहीं होता है जीवन में कई बार लगातार चलते जाना किन्तु इसके बावजूद इंसान को आगे चलना होता है। कई दर्द सहकर इंसान बेहतर होता है। अक्सर जीवन में ऊपर उठने के लिए बहुत कुछ सहना होता है।
जीवन का इम्तिहान का शैक्षिणक से बहुत अलग होता है।
जहां इम्तिहान को पास करने के लिए तैंतीस मार्क्स नहीं बल्कि अपना बेहतर देना होता है। जहां पर अपना पर्चा स्वयं बनाना और जांचना होता है।
इस परीक्षा के बीच कई बार लगता है तुम्हें कैसे पास हो पाएंगा। शैक्षिणक परीक्षा से पहले हर इंसान को जीवन का इम्तिहान देना होता है। जीवन के इम्तिहान में कई बार हारने, जीतने से ज्यादा उससे लड़ना जरूरी होता है।

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