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दादा साहेब फाल्के


सिनेमा किसी भी समाज का दर्पण होता है ∣ जो समाज में हो रही हर अच्छी- बुरी घटना को लोगों के बीच प्रस्तुत करता है ∣ 
भारत में सिनेमा को लाने का पूरा श्रेय 'दादा साहेब फाल्के' को जाता है ∣ जिन्होने न सिर्फ बतौर डायरेक्टर भारत में अपनी फिल्म बनायी बल्कि लोगों को संचार के एक नए माध्यम से भी परिचय कराया। 
दादा साहेब की पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र ' थी। जो आगे चलकर भारत की पहली मूक फिल्म कहलायी। जो कि 3 मई 1913 को रिलीज़ की गयी थी। 
इसके बाद तो जैसे दादा साहेब ने एक के बाद एक धार्मिक कथाओं पर अपनी फिल्म लोगों के बीच प्रस्तुत की। 
इस बीच उन्हें अनेक तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। जैसे महिला का किरदार निभाने के लिए उस समय कोई भी महिला राजी नहीं होती थी। इसका कारण उस समय महिला के लिए सिनेमा को ठीक न समझा जाना था। 
इस कारणवश महिला किरदारों की भूमिका में पुरुष ही निभा लिया करते थे। 
आज जब हम सिनेमा के पूरे की यात्रा को देखते हैं तो पाते हैं कि सिनेमा ने काफी हद तक हमारे समाज की सोच को बदला है ∣

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