किताबों की दुनिया बहुत खास होती है ∣ जहां पर वो और सिर्फ हम होते हैं ∣ उनसे न जाने कितनी अनगिनत यादें हमारी जुड़ी होती है ∣ जब एक अरसे के बाद उन्हें हम खोलते हैं। जीवन के अच्छे बुरे स्मरण जैसे हमें याद आ जाते हैं ∣
कुछ पुरानी किताबों की महत्ता कभी कम नहीं होती है ∣ वो लोगों के द्वारा बड़े ही चाव से पढ़ी जाती है ∣ अच्छी या बुरी किताब जैसी कोई बात ही नहीं होती है ∣ केवल कुछ को समझने के हम लायक तो कुछ नहीं होते हैं ∣
हर एक किताब लिखे जाने के पीछे अपने हमराज होते हैं। कोई इससे अपनी कला का लोहा बनवाने के लिए लिखता है ∣ तो कोई किसी नयी चीज की खोज कर उसमें लिखता है ∣
हर किताब से इंसान उतना ही समझता है जितना की उसका सामर्थ्य होता है ∣ हर बार एक ही परिभाषा का मतलब हमारे लिए अलग होता है ∣ जीवन के अनुभव के साथ हमारा चीजों को समझने का नजरिया भी अच्छा होता है ∣
एक इंसान हमेशा कितना भी पढ़ ले इसके बावजूद वो दुनिया की बहुत सी किताबों से अनभिज्ञ सा होता है ∣ हर बार जब हम जाते हैं किताबों की दुनिया में तो ऐसा लगता है जैसे हम में अभी भी कितना खालीपन सा भरा हुआ है ∣

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