मैं पृथ्वी हूं


मैं वो हूं जिस पर तुम रहते हो। जो तुम्हारे वजन‌ को उठाये हुए है ∣ 
मैं पृथ्वी हूं जो आज तुम्हारे  दबाव को त्राहिमाम् कर रही हूं ∣ मुझ पर तुमने घर बनाएं मैंने कुछ न कहा। मुझ पर तुमने सड़के बनायी। तब भी मैं चुप रही। 
किन्तु आज जब मेरे ऊपर तुम्हारे ढेरों अत्याचार बढ़‌ गए हैं ∣ ऐसे समय में मुझें‌ बोलना पड़ रहा है। 
तो सुनों मेरी बात, तुम लोग जो  मुझे चीर लगातार भूगर्भीय जल का उपयोग कर रहे हो, उसे अब बंद कर दो‌। जो तुम मुझ पर प्रदूषण से वार कर रहे हो वो बंद कर दो। वो प्लास्टिक का टन भर से ज्यादा कचर जो तुमने मेरे ऊपर डाला है उसे बढ़ाना बंद कर दो। 
अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो आने वाली प्रलय को रोकना किसी विज्ञान के उपकरण द्वारा संभव नहीं होगा । 

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