Skip to main content

मैं पृथ्वी हूं


मैं वो हूं जिस पर तुम रहते हो। जो तुम्हारे वजन‌ को उठाये हुए है ∣ 
मैं पृथ्वी हूं जो आज तुम्हारे  दबाव को त्राहिमाम् कर रही हूं ∣ मुझ पर तुमने घर बनाएं मैंने कुछ न कहा। मुझ पर तुमने सड़के बनायी। तब भी मैं चुप रही। 
किन्तु आज जब मेरे ऊपर तुम्हारे ढेरों अत्याचार बढ़‌ गए हैं ∣ ऐसे समय में मुझें‌ बोलना पड़ रहा है। 
तो सुनों मेरी बात, तुम लोग जो  मुझे चीर लगातार भूगर्भीय जल का उपयोग कर रहे हो, उसे अब बंद कर दो‌। जो तुम मुझ पर प्रदूषण से वार कर रहे हो वो बंद कर दो। वो प्लास्टिक का टन भर से ज्यादा कचर जो तुमने मेरे ऊपर डाला है उसे बढ़ाना बंद कर दो। 
अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो आने वाली प्रलय को रोकना किसी विज्ञान के उपकरण द्वारा संभव नहीं होगा । 

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..