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किताबों से निकलकर व्यावहारिकता में आना जरूरी है



बचपन से ही हम पर्यावरण का विषय पढ़ रहे है जिसकी परिभाषा तो हमें मुंह जुबानी याद है। 'हमारों चारों ओर का घेरा हुआ आवरण जिसमें हम रहते है पर्यावरण कहते है।
पर अफसोस उस पर्यावरण का अर्थ हमने अब तक नहीं जाना है। आज हम प्रकृति के प्रति इतने ज्यादा लापरवाह हो रहे है कि हमने ये देखना बंद ही कर दिया है। कि आज हमारे चारों तरफ एक ऐसी समस्या खड़ी हो रही है जिसका समय रहते निराकरण नहीं किया। तो वो  दिन दूर नहीं। जब हम आक्सीजन, जल ,भोजन और स्वच्छ हवा जैसी चीजों से दूर हो जाएंगे। आने वाली पीढ़ी को केवल हम बीमारी से ग्रस्त वातावरण देगें।
आज हम सबको पता है कि पृथ्वी पर 70 प्रतिशत पानी  उपलब्ध तो है, इसमें से 2.6 प्रतिशत जल ग्लेशियर के दक्षिणी ध्रुव में जमा हुआ है। हमें केवल 0.6 प्रतिशत जल ही पीने के लिए उपलब्ध है। इसके बावजूद हम पानी का अंधाधुंध उपयोग कर रहे है। केवल गर्मी के समय में हमें उस पानी की अहमियत थोड़ी बहुत अहमियत समझते है। 
 आज हम प्रदूषण करने से भी बाज नहीं आ रहे है।
। आधुनिकता के मायाजल से निकलकर ये देखने की कोशिश ही नहीं रहे है। कि हमारे द्वारा हर काम के लिए गाड़ी का प्रयोग करना, तेज आवाज में गाने सुनना, आस्था के नाम पर नदी में साम्रगी बहाना, एक कपड़े को ज्यादा न पहनने की प्रवृति को फैशन का नाम देना हमारे वातावरण को ओर ज्यादा बीमार बना रहा है। 
किन्तु हमारा ध्यान तो केवल पर्यावरण दिवस पर ही उस पर जाता है। बाकी दिन तो हमें टैड फोलो करने से लगे रहते है। 

पर अब भी समय है। वरना वो दिन दूर नहीं जब हम एक ऐसे काल में होगें । जहां हम दाने दाने को मोहताज और कम चीजों में ही जीवनयापन करने को मजबूर होंगे।
आओं हम सब मिलकर एक नया भविष्य लिखें
जहां हम प्रकृति के साथ हो
पेड़ो से हमारी दोस्ती हो
कुछ दूर पैदल चलने की हमारी आदत हो
जितनी जरूरत हो उतना ही हम चीजों को 
इस्तेमाल करने की सोच रखते हो।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..