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कड़वे सवाल पूछती समाज से 2001 में आयी लज्जा मूवी



मर्यादा मत तोड़ो
तोड़ी हुई मर्यादा तुमको
कुचलकर रख देगी। 

आज भले ही 2023 का साल चल रहा हो, किन्तु अफसोस हमारे आस पास मौजूद लोगों की सोच वही पुराने जमाने की है ∣ जो समय के साथ अपने कपड़े और रहन सहन में तो‌ बदल गए पर सोच वहीं रखी। 
कि लड़की को ज्यादा पढ़ने का मतलब उसे आजाद करना है ∣ एक लड़की जब विदा होकर जाती है तो फिर लौटकर नहीं आती है ∣ यहां एक लड़की को जरूरी है अपनी पवित्रता का प्रमाण देना। 
 साहित्य की तरह सिनेमा भी 
समाज का दर्पण होता है ∣ जो उसका का प्रतिबिंब दिखा रही होता है ∣ 

आज भी महिलाओं के खिलाफ किए जा रहे अपराधों में ज्यादा कुछ परिवर्तन नहीं आया है ∣ जहां लड़की के परिवार से दहेज की मांग, लड़की का घर की चार दीवारी में रखने की सोच में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है ∣ इन्हीं सभी विषयों पर
 2001 में राजकुमार संतोषी की डायरेक्ट में आयी मूवी 'लज्जा' वो कड़वे सवाल कड़वे इस समाज से पूछते है ∣ जहां देवी रूप समझी जाने वाली स्त्री की ही हर जगह सिर्फ परीक्षा लेना उचित समझा जाता है ∣ जहां हमेशा गलत वो‌ लड़की ही होती है ∣
जो केवल इस दुनिया में एक स्त्री बनकर आयी है इसके अलावा कुछ नहीं। 
मंटो का एक कथन इस मूवी पर बिल्कुल सटीक बैठता है कि वो‌ ही लिखता हूं जो समाज में मौजूद है ∣ 'मैं उस समाज की चोली क्या उतारूंगा जो पहले से ही नंगी है। उसे कपड़े पहनाना मेरा काम नहीं। 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..