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रसों में समाया जीवन


रस की उत्पति मनुष्य के भाव और अनुभव से होकर गुजरती है। हम सब के जीवन में रस का विशेष महत्व होता है। रस के बिना किसी भी चीज का स्वाद अधूरा सा होता है। जो उस खाने की तरह होता है जिसे सिर्फ खाया जा सकता है। किन्तु उसका स्वाद बेहतर नहीं होता है। इसे खाकर ये नहीं कहा जा सकता है कि ये बहुत स्वादिष्ट है ।
जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच मनुष्य अलग -अलग तरह के रस का पान करता है। जो उसके जीवन को पूर्ण करता है। जीवन का मतलब ही सुख और दुख है। फर्क महज इससे होता है कि जब मनुष्य अपने में सुखी होता है तब वो उसके रस का पान करने लगता है। उसके मन में कभी श्रृंगार रस तो कभी हास्य रस का संचार होता है। 
जबकि इससे बहुत अलग जब मनुष्य के जीवन में दुख का पहाड़ आ जाता है तब उसके मन में करूणा रस का संचार होता है। परिस्थितियों के मुताबिक, बदल जाता है इंसान का मन कभी वो अपने जीवन से खुश, तो कभी निराश होता है।
जीवन का यहीं क्रम होता है। हर कदम - कदम पर आगे चलते जाना ही जीवन का नाम होता है। 

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..