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गरीबी और लाचारी का वास्तविक चित्रण दिखाती है पाथेर पांचाली मूवी



पाथेर पांचाली सत्यजीत जी रे के लेखन और निर्दैशन में बनी सबसे सुपरहिट फिल्म रही है जिसकी गहरी छाप आज तक लोगों के दिल और दिमाग में बसी हुई है∣
इस मूवी में मुख्य तौर पर गरीबी और लाचारी के बीच मानव की हो रही दुर्गति को दिखाया गया है ∣ इसके चलते इंसान का जीवन नरक बन जाता है उसे एक एक रोटी के लिए मोहताज होना पड़ता है 
इस मूवी की कहानी एक लाचार बहन और भाई की कहानी है जिनका नाम दुर्गा और अपू है जो कि बहुत मिल जुल कर रहते हैं उनके पिता ज्यादातर गांव से बाहर ही रहते हैं ∣ जबकि घर पर मां रहती है पैसों की कमी के चलते मां को घर चलाने के लिए बर्तनों को बेचाना पड़ता है पिता चाहकर भी मदद नहीं कर पाता है उसका व्यापार लगातार घाटे में चल रहा होता है ∣
इसके चलते घर की स्थिति बहुत खराब हो जाती है ∣
बरसात से पहले घर की मरम्मत करवानी रहती है किन्तु पैसे के अभाव के चलते घर की मरम्मत नहीं हो पाती है ∣ एक तरफ दुर्गा बहुत बीमार हो जाती है दूसरी तरफ घर की हालात खराब हो रही होती है जब डॉक्टर की दवा से भी वो ठीक नहीं होती है तब उसकी मां को उनकी बहुत चिंता में होती है जोर की बरसात के बीच एक तरफ उनका घर टूट जाता है दूसरी तरफ दुर्गा इस दुनिया को छोड़ चली जाती है ∣
अफसोस उसका पिता शहर से अपनी बेटी के लिए बहुत कुछ लाता है किन्तु उस वक्त शेष बचता है केवल गरीबी और उसकी लाचारी जिसके चलते दुर्गा इस दुनिया को छोड़ चली जाता है ∣
इस मूवी को देखने का कारण गरीबी के अभाव में नन्ही आंखों से टूट रहे सपने को देखा जा सकता है  एक -एक पैसे के लिए मोहताज होते लोगों को देखा जा सकता है उस माँ की बेबसी को देखा जा सकता है जो चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती है ∣ इसके अलावा एक अच्छी फिल्म वास्तव में होती क्या है उसे समझा जा सकता है ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..