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WORLD RADIO DAY




हर साल 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इससे मनाने की घोषणा 2011 में यूनस्को ने की थी  यूनेस्को ने अपनी घोषणा में इस बात पर जोर दिया था कि रेडियों ऐसा माध्यम है ∣ जो कमजोर तबको से लेकर अल्पसंख्यकों तक अपनी बात पहुंचता है। तब से ये दिवस मनाया जाता है।
बता दे कि रेडियों एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो साक्षर से लेकर निक्षर के लिए उपयोगी होता है। जो कम समय में लोगों को वो सारी महत्वपूर्ण चीजें बता देता है जो कि लोगों को जानना जरूरी है।
जब भारत में रेडियों की हम बात करते है तो पाते है कि राजनेता से लेकर प्रधानमंत्री ने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए रेडियो का सहारा लिया है। इसके चलते वो जन मानस का पंसदीदा माध्यम बन गया।
इसकेअलावा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने लोगों को संबोधन करने के लिए भी रेडियो का माध्यम चयन किया। 
भारत में सखी सहेली. हेलो फरमाइश , कृषि दर्शन और युवावाणी जैसी पसंदीदा कार्यक्रम के चलते ये एक समय तक लोगों के बीच में काफी चर्चा का विषय बना गया था।
आज ए. एफ ए्म हर कोई सुन रहा है । ये पहले की तुलना में और ज्यादा विस्तारित हो गया है।
 इसी क्रम में रेडियों का एक नया स्वरूप भी काफी चर्चा का विषय है जिसें हम 'कम्युनिटी रेडियों' के नाम से भी जानते है। जो आज उन लोगो के लिए वरदान बना है जिन तक सामान्य रेडियों की पहुंच नहीं है।
आपको बता दें, कि कम्युनिटी रेडियो का आशय  ऐसे रेडियो से है जो किसी एक भाषीय और समुदाय के लिए लाया जाता है इसका उद्देश्य धन अर्जन का न होकर समाज कल्याण होता है ∣



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..