Skip to main content

खालीपन के बीच हम

लाइब्रेरी एक स्थान जहां जाते ही हम दुनिया की सभी बुराई को भुल आगे का रास्ता चुनते है ∣ दुनिया में अभी कितनी अच्छाईयां है ∣ ये हम किताबों के जरिए जानते हैं ∣ 
अपने अंदर के खालीपन का एहसास हम लाइब्रेरी में करते हैं ∣ जहां पर जाते ही हम ऐसा महसूस करते है ∣ जैसे हमें अभी भी कितना कुछ जानना बाकी है ∣ हम अंदर से कितने अभी खाली है ∣
सिखाने की प्रक्रिया से हमारा तब वास्ता होता है ∣ कितना भी किताब पढ़ लिया जाएं किन्तु जब हम लाइब्रेरी में कदम रखते हैं ∣ तब हमारा सामना हमारे खालीपन से होता है ∣ जो हमें यकीन दिलाता है कितना कुछ पढ़ना अभी बाकी है ∣ 
जो कभी खत्म न होने वाले इतिहास की तरह है ∣ जो जितना पढ़ा जाए उतना कम है ∣

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..