क्रोध अक्सर बनते हुए रिश्तों को बिगाड़ देता है ∣ दो जुड़ते हुए रिश्तों में दरार डाल देता है ∣ इसके चलते रिश्तों में मिठास की जगह कड़वाहट आ जाती है ∣ इसलिए कहते हैं कि कुछ पल की दूरी और मौन अक्सर जरूरी होता है ∣ न चाहते हुए भी अक्सर चुप रहना होता है ∣ ताकि बीज बनने से पहले कमजोर न पड़ जाए ∣
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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