त्याग समर्पण से भरी है नर्मदी की कहानी

बहुत पहले मैंने हिन्दी की किताब में एक कहानी पढ़ी थी ∣ इसका शीर्षक नर्मदी था ∣ इस कहानी में एक गरीब लड़की और उसके पिता के जीवन को दिखाया गया है ∣ इसमें वो किस तरह से सीमित साधन में अपना जीवन व्यापन कर रहे होते हैं ∣ एक दिन उन्हें घर की मरम्मत करने की लकड़ी की जरूरत पड़ती है ∣ तब वो जंगल में लकड़ी लेने जाते हैं ∣ उस समय गर्मी का समय था इसके चलते वो एक दो दिन के लिए अपने साथ कुछ रोटी और पानी लेकर जाते हैं ∣ किन्तु उनका पानी रास्ते में ही खत्म हो जाता है ∣ तब बेटी अपने पिता से पानी मांगती है  ∣ तब पिता बेटी की तसल्ली के लिए उसे कहकर पानी लेने निकल पड़ता है ∣ पर अफसोस उसे पानी की एक बूंद भी नहीं मिलती है ∣ जब वो वापस अपनी बेटी के पास आता है ∣ तब वो पाता है कि उस जगह पर कोई नहीं है तब वो अपनी बेटी को बहुत आवाज लगता है किन्तु किसी कि आवाज नहीं आती है ∣ जब वो बेटी को खोजने जाता है तो उसे एक जगह पानी के तेज आवाज के बीच अपनी बेटी की आवाज आती है ∣ जो अपने पिता से कहती है कि मैं दूसरों की प्यास बुझाने के लिए नर्मदी बन गयी हूं अब यहां पर कोई प्यास नहीं मरेगा ∣ 

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