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इस बार के गणतंत्र दिवस में क्या रहा खास जानें


जब बात एक जन कल्याणकारी शासन चलाने की आती है ∣ तब हमारे आंखों के सामने शासन का वो रूप आ जाता है ∣ जो कि एक कल्याणकारी समाज का प्रतिनिधित्व करता है ∣ 
लोकतंत्र जो जनता के लिए  जनता के द्वारा बनाया गया शासन है जिसमें जनता का प्रतिनिधित्व होता है ∣ जनता जिसमें बड़ी होती है ∣
इस बार भारत ने अपना 74 वां गणतंत्र दिवस मनाया है ∣ इस अवसर पर आज हम जानेगें आखिर इस बार का गणतंत्र क्यों रहा है ?इतना खास
आपको बता दे 
  • इस बार ये पहला अवसर है जब किसी आदिवासी महिला राष्ट्रपति ने गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम को सुचारू रूप से सम्पन्न कराया है ∣
  • इस बार जो 21 तोपों की सलामी दी गयी है ∣ वो पूरी तरह से स्वदेशी है ∣ पहले ब्रिटिश 25 लोढ़ा तोप का इस्तेमाल किया जाता था ∣ किन्तु इस बार 105 एमएम वाली भारतीय तोपों का इस्तेमाल किया गया है ∣
  • इसके अलावा इस बार झांकियों का मुख्य केन्द्रबिंदु नारी शक्ति था ∣ इसमें विशेष रूप से महाराष्ट्र , केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और त्रिपुरा ने नारी शक्ति तथा महिला सशक्तिकरण पर झांकी निकाली थी  ∣
  • जहां एक तरफ महाराष्ट्र की ओर से पेश की जा रही झांकी अमृत महोत्सव की पृष्ठभूमि पर आधारित थी ∣
  • वहीं केरल में इस बार नारी शक्ति और महिला सशक्तिकरण की लोक परंपराओं पर झांकी पेश की गयी है इसमें 'कालरिपायटू 'भी शामिल थी ∣ जो कि एक मार्शल आर्ट है इसका इतिहास 2000 साल अधिक पुराना है ∣
  • इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी    मुख्य अतिथि के तौर पर भारत आए हैं ∣ सहयोग वश भारत और मिस्र के रिश्तों को भी 75 साल होने जा रहे हैं ∣
  • इस बार परेड में मिस्र भी शामिल हुआ है ∣
  • ये पहला अवसर है जब भारत जी 20 की अध्यक्षता कर रहा है ∣ जिसकी थीम वन फैमिली, वन अर्थ और वन फ्यूचर है ∣
  • भारत विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है ∣
  • ये पहला अवसर है जब भारत की विविधता दिखाती हुई झांकियो में उत्तर प्रदेश से राम मंदिर की झांकी निकाली गयी है ∣

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..