उनके नाटकों में लहरों के राजहंस,आषाढ़ का एक दिन, आधे अधूरे हैं ∣
जब हम आधे अधूरे नाटक का सारांश देखते हैं ∣ तो पाते हैं कि वो एक मध्यमवर्गीय परिवार पर आधारित है ∣ जहां पर पत्नी काम करती है ∣ पति घर पर नौकरी की तलाश करता है ∣ इसके चलते पत्नी पति की इज्जत नहीं करती है ∣
घर के बच्चों पर भी इसका असर होता है ∣ बड़ी बेटी घर से भाग जाती है ∣ बेटा माँ बाप का सम्मान नही करता है ∣ छोटी बेटी बहुत ज्यादा चिड़चिड़ी हो जाती है ∣ इसी के इर्द गिर्द मोहन राकेश का नाटक आ़धे अधूरे हैं ∣ जो हमें समाज एक दूसरा आईना दिखाता है ∣

Comments