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सच को सच की तरह लिखा जाना क्यों जरूरी है बताती है एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

कहते हैं अक्सर जो जीवन में तटस्थ होते हैं उनका भी इतिहास लिखा जाता है ∣ सच चाहे कितना भी क्यों न कड़वा हो वो लिखा जरूर जाता है ∣ 
जब बात आती मनमोहन सिंह की तो तब ये समझना और भी जरूरी हो जाता है ∣ अक्सर जो चीज मीडिया में दिखाई और चलाई जा रही है ∣ उससे बहुत अलग किसी की जिंदगी  होती है ∣ जो चीजें जैसी दिखाई जा रही है ∣ वो वैसे ही हो अक्सर आवश्यक नहीं होता है ∣
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बारे में अक्सर ये सुनने को मिलता है कि वो अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में  इंदिरा गांधी के हाथो की कठपुतली थे जो उनके मुताबिक ही  काम करते थे∣ किन्तु सिंह का इससे अलग भी एक नजरिया और देश को चलने की सोच थी जिनका दृष्टिकोण देश को लेकर कितना व्यापक था ये हम इस मूवी को देखकर समझ सकते हैं

इसी मूवी की सबसे अच्छी बात है कि इसमें कहीं भी बनावटी पन नजर नहीं आता है पटकथा से लेकर इसका संपादन काफी अच्छे से किया गया है ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..