सच को सच की तरह लिखा जाना क्यों जरूरी है बताती है एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

कहते हैं अक्सर जो जीवन में तटस्थ होते हैं उनका भी इतिहास लिखा जाता है ∣ सच चाहे कितना भी क्यों न कड़वा हो वो लिखा जरूर जाता है ∣ 
जब बात आती मनमोहन सिंह की तो तब ये समझना और भी जरूरी हो जाता है ∣ अक्सर जो चीज मीडिया में दिखाई और चलाई जा रही है ∣ उससे बहुत अलग किसी की जिंदगी  होती है ∣ जो चीजें जैसी दिखाई जा रही है ∣ वो वैसे ही हो अक्सर आवश्यक नहीं होता है ∣
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बारे में अक्सर ये सुनने को मिलता है कि वो अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में  इंदिरा गांधी के हाथो की कठपुतली थे जो उनके मुताबिक ही  काम करते थे∣ किन्तु सिंह का इससे अलग भी एक नजरिया और देश को चलने की सोच थी जिनका दृष्टिकोण देश को लेकर कितना व्यापक था ये हम इस मूवी को देखकर समझ सकते हैं

इसी मूवी की सबसे अच्छी बात है कि इसमें कहीं भी बनावटी पन नजर नहीं आता है पटकथा से लेकर इसका संपादन काफी अच्छे से किया गया है ∣


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