जिस तरह तु बोलता है उस तरह तु लिख अपने से बड़ा बनकर तु दिख भवानीप्रसाद मिश्र की ये पंक्ति आज के समय में भी संवाद और लेखन की कला के महत्व का सबसे बेहतर उदाहरण है ∣
आज हमारे संवाद करने की कला का असली महत्व हमें तब मालूम चलता है∣ जब हम कोई कठिन चीज किसी को आसान भाषा में बताते हैं ∣ संवाद का असली महत्व तब ही तो समझ आता है ∣
आसान नहीं होता है संवाद करना जब हमें किसी को ऐसे विषय पर बताना पड़ता है जिसको लेकर हमारा भी ज्यादा कुछ अनुभव न हो∣
कुछ चीजें केवल मौखिक संवाद से, तो कुछ केवल लिखित संवाद से ही समझायी जा सकती है ∣ इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति लिखित और मौखिक दोनों तरह का संवाद कर लेता है ∣ तो ये उसके जीवन की बहुत बड़ी सार्थकता होती है ∣
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