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संवाद करने की कला का महत्व

जिस तरह तु बोलता है उस तरह तु लिख अपने से बड़ा बनकर तु दिख भवानीप्रसाद मिश्र की ये पंक्ति आज के समय में भी संवाद और लेखन की कला के महत्व का सबसे बेहतर उदाहरण है ∣
   
आज हमारे संवाद करने की कला का असली महत्व हमें तब मालूम चलता है∣  जब हम कोई कठिन चीज किसी को आसान भाषा में बताते हैं ∣  संवाद का असली महत्व तब ही तो समझ आता है ∣
आसान नहीं होता है संवाद करना जब हमें किसी को  ऐसे विषय पर बताना पड़ता है जिसको लेकर हमारा भी ज्यादा कुछ अनुभव न हो∣
कुछ चीजें केवल मौखिक संवाद से, तो कुछ केवल लिखित संवाद से ही समझायी जा सकती है ∣ इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति लिखित और मौखिक दोनों तरह का संवाद कर लेता है ∣ तो ये उसके जीवन की बहुत बड़ी सार्थकता होती है ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..