बला की पैदाइश समझी जाने वाली लड़की की जात


आज भी जब बात लड़का और लड़की की आती है तो एक आवाज आती है अरे लड़का ही होगा ∣
ये आवाज कभी किसी घर तो कभी किसी समाज से आ रही होती है जो कि हमारे समाज के एक बड़े भाग प्रतिनिधित्व कर रही होती है ∣
 जो आज के युग में भी भले चाहे कितना भी आधुनिक बनने की कोशिश क्यों न करें किन्तु उनकी रूढ़िवादी  सोच मालूम ही चल जाती है ∣
अफसोस तो तब होता है जब उसका समर्थन खुद एक स्त्री करती है ∣ जो लड़के के इस दुनिया में आने का मतलब ही सबकुछ अच्छा होना समझती है ∣
आज भी हर घर में बैठी एक लड़की के मन में ये सवाल आत है काश मैं भी लड़का होती तो मेरे जन्म को भी अच्छा समझा जाता है ∣
सबकी जरुरत और सेहत का ध्यान रखने वाली का उस समय कोई अस्तित्व जैसे नहीं होता है ∣ लड़के को जरा सी चोट लगा जाएं तो सारा घर सिर पे उठ जाता हैं ∣ लड़की बीमार भी हो जाएं तो जैसे आम बात होती है ∣ ये सोच तब तक नहीं बदल सकती है ∣ जब तक खुद एक स्त्री खुद के जन्म को व्यर्थ मानती केवल लड़के के जन्म पर खुशियां बांटती रहेगी  ∣ 

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