Skip to main content

जानें मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध लोककथा

 हर राज्य की अपनी कुछ लोकथा  होती है जिनका अपना महत्व होता है ∣ जो केवल लोक रूचि ही नहीं अपितु जनसामान्य के जीवन के लिए भी उपयोगी होती है आज में आपको मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध लोककथा के बारे में बताने जा रही हूं∣

1. बितयानी

बितयानी एक ऐसे लड़के की कहानी है जिसका भाग्य उससे बहुत ही ज्यादा रूठा हुआ है ∣ बचपन में ही उसके माँ बाप के इस दुनिया से जाने के बाद उसके मामा मामी ने उसकी जीवन नरक बना दिया है ∣ जो उनके लिए एक मुफ्त का नौकर के अलावा और कुछ भी नहीं है ∣जो उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं ∣

एक समय की बात है जब बितयानी को उसके मामा मामी जान से मारने की कोशिश करते हैं ∣ वो कोई ऐसा उपाय खोजते जिससे सांप भी मर जाएं और लाठी भी न टूटे ∣

 

बितयानी को गांव से शहर में खराब मांस बेचने को भेजते हैं जिससे कि वो लोगों से धोखा देने के जुर्म में मरा जाएं लेकिन उसके भाग्य के चलते वो अपनी चतुराई से उस खराब मांस को भी बेचा आता है ∣ इसके चलते मामा लालच वश बाजार में फिर खराब मांस बेचने जाता है ∣ तो उनका मांस कोई नहीं खरीदता ∣ वो बितयानी पर बहुत क्रोध करते है ∣ और कहते है अब तो इसे जान से मर दूंगा  ∣ 

घर आकर होगा वो शहर में राख को बेचने को भेजते हैं और कहते है कि अगर ये न बिका तो समझों आज तुम इस दुनिया से गए  ∣ 


बितायनी शहर में राख  बेचने जाता है  उसके संग ऊंट  भी भेजते है बितायनी शहर की ओर निकलता है तब उससे एक आदमी मदद मांगने के लिए आता है उसकी पत्नी की हालात बहुत खराब है  और उससे डाक्टर के पास शहर में ले जाना है∣ तब वो बितयानी अपनी बुद्धि का उपयोग कर उसके सामने एक शर्त रखा देता है कि मेरे पास बेरो में बहुत सारे पैसे से जो मैं शहर ले जा रहा हूं अगर वो रास्ते में कहीं गिर ग ए तो वो राख बन जाएगा अगर वो गिरे तो मैं तुम से उसके बदले में पैसे वसूल करूंगा वो आदमी मान जाता है ∣

अब वो शहर की ओर बढ़ने लगते हैं बहुत दूर चलने के बाद उनके रास्ते में एक बड़ा सा पत्थर आ जाता है जिससे बचने के चक्कर में वो बोरा नीचे गिर जाता है उससे सारी राख बाहर की ओर आनी लगती है ∣ तब वो बितयानी उससे पैसे ले लेता है और फिर वो शहर ओर चलते है ∣ 

जब वो घर पहुंचता तब मामा पूछते हैं कि वो राख कहां गयी? तब वो कहता है कि वो तो मैं शहर बेचा आया अब मामा भी शहर राख लेकर बेचने जाता है ∣

पूरा शहर घूमने के बाद उसकी राख नहीं बिकती  तब वो घर आकर बितयानी को बहुत मारता है उससे एक बोरे में भर गांव की नदी के किनारे छोड़ आता है ∣ तब बितयानी बहुत उदास हो जाता है कि अब तो मेरा मरन निश्चित हो गया है मुझे इससे कोई नहीं बचा सकता है ∣ तब बितयानी एक युवक की आवाज सुनता है जो कि एक मूर्ख के समान बात करता है बितयानी बोरी से ही उससे आवाज लगता है और कहता है कि  नदी में बहुत सारा सोना है इसलिए वो नदी की ओर जा रहा है∣ क्या वो उसे नदी में डाल देगा ∣

तब वो लालची युवक कहता है कि मुझे भी सोना चाहिए ∣ क्या तुम मुझे जानें दोगे? तब वो कहता है क्यों नहीं तुम्हें इसके बदले मुझे थोड़े पैसे देने होगे ∣ वो युवक बितयानी की बात को मान जाता है और खुद को बोरी आ जाता है और बितयानी को उससे पानी में डाल देता है ∣

बितयानी को घर में देख उसके मामा मामी क्रोधित हो जाते हैं किन्तु जब वो उसके हाथ में पैसे देखते हैं तो उसका कारण पूछते बितयानी सबकुछ बता देता है ∣ उसके मामा मामी उसे कहते हैं कि हमें भी नदी में डाल दो बितयानी एक एक कर दोनों नदी में डाला आता है ∣ इस तरह  लालची मामा मामी के जीवन अंत हो जाता है ∣


Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..