लेखन

"जिस तरह तु बोलता है
उस तरह तु लिख अपने से बड़ा बनकर दिख"

भवानी प्रसाद मिश्र के द्वारा कहीं गयी ये बात लेखन पर बिल्कुल ठीक बैठती है ∣ आज लेखन की गुणवत्ता में कमी आने का ये भी कारण है ∣ कि हम में से ज्यादा लोग किसी भी विषय पर सोचते तो बहुत है ∣ 
किन्तु जब उस पर कुछ लिखने बैठते हैं ∣ तब वो नहीं लिख पाते हैं ∣

जिस दिन हमने अपने सोचे हुए को पूरी तरह लिखना सीख लिया उस दिन एक अलग तरह की अभिव्यक्ति होगी ∣ वो बहुत अनोखा होगा जिस पर इसकी की पूर्ण अभिव्यक्ति होगी ∣



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