हर दिन उसी लाइब्रेरी में जाना होता है ∣ इसके बावजूद जब किसी बुक के नए सेक्शन पर जाओं ∣ तो लगता है जैसे पहली बार ही हमारा इससे परिचय हुआ है ∣
कितना कुछ नहीं जानते हैं हम अभी इस दुनिया के बारें में कितना कुछ पढ़ा जाना बाकी है ?
हम किताबों के बीच एक अलग सा सुकून महसूस करते है ∣ कितनी खूबसूरत होती है न ये लाइब्रेरी की दुनिया जहां हर तरफ केवल एक जिज्ञासा का वातावरण होता है ∣हर कोई किताबों में जिज्ञासु भरी नजर से देख रहा होता है ∣ कुछ नया सा मिल जाएं उसे इस आश में वो किताबों को पलट सा रहा होता है ∣
जहां पर एक अजीब सा सुकून होता है ∣ न होती है किसी तरह की नकरात्मकता केवल खुद से खुद का वास्ता होता है ∣ एक अलग सी दुनिया में खो जाते हैं ∣ किताबों की धूल हटते हुए जैसे हमारा खुद से साक्षात्कार होता है ∣
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