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काॅलेज की लाइब्रेरी में


हर दिन उसी लाइब्रेरी में जाना होता है ∣ इसके बावजूद जब किसी बुक के नए सेक्शन पर जाओं ∣ तो लगता है जैसे  पहली बार ही हमारा इससे परिचय हुआ है ∣
कितना कुछ नहीं जानते हैं हम अभी इस दुनिया के बारें में कितना कुछ पढ़ा जाना बाकी है ? 
 हम किताबों के बीच एक अलग सा सुकून महसूस करते है ∣ कितनी खूबसूरत होती है न ये लाइब्रेरी की दुनिया जहां हर तरफ केवल एक जिज्ञासा का वातावरण होता है ∣हर कोई किताबों में जिज्ञासु भरी नजर से देख रहा होता है ∣ कुछ नया सा मिल जाएं उसे इस आश में वो किताबों को पलट सा रहा होता है ∣

जहां पर एक अजीब सा सुकून होता है ∣ न होती है किसी तरह की नकरात्मकता केवल खुद से खुद का वास्ता होता है ∣ एक अलग सी  दुनिया में  खो जाते हैं ∣ किताबों की धूल हटते हुए जैसे हमारा खुद से साक्षात्कार होता है ∣





Comments

Unknown said…
हर दिन उसी लायब्रेरी में जाना होता है को अपनी मजबूरी न समझो । लायब्रेरी न खत्म होने वाला विशाल ज्ञान भंडार है । इसलिए ज्यादा से ज्यादा प्रयास करो लायब्रेरी से ज्ञान पाने का । इसलिए पुस्तकालय के 5 नियमों में से एक नियम में कहा गया है ** प्रत्येक पुस्तक को उसका पाठक मिलना चाहिए **

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Today Thought

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हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..